मध्यप्रदेश/ग्वालियर के विवेक विहार कम्युनिटी हॉल में चल रही संगीतमय भागवत के दूसरे दिन भागवत आचार्य सुश्री पंडित गायत्री देवी ने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य से प्रभु भक्त, सेवा और सत्संग है जो व्यक्ति सच्चे मन से भगवान का स्मरण करता है उसके जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं कथा के दौरान भजनों की मधुर प्रस्तुति ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया और श्रद्धालु राधे-राधे के जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा कथा व्यास ने कहा की श्रीमद् भागवत कथा केवल कथा नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने का दिव्य मार्ग है कथा श्रवण करने से मन को शांति परिवार में सुख समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है उन्होंने कहा यह श्रीमद् भागवत रूपी ग्रंथ रत्न, वेद रूपी कल्पवृक्ष का पका हुआ अत्यंत दुर्लभ फल है सुखदेव जी महाराज के मुख से स्पर्श हो जाने के कारण यह अमृत रस से पूरी तरह परिपूर्ण हो गया है कथा व्यास पीठ से सुश्री पंडित गायत्री शर्मा ने कहते हुए बताया कि श्रीमद् भागवत में 18000 श्लोक हैं जिसमें से भगवान के मुख से निकले लगभग 1500 होंगे बाकी अन्य श्लोक में भगवान के भक्त ध्रुव, प्रहलाद आदि की कथाएं हैं लेकिन भगवान के भक्तों की कथाएं भी भागवत ही है उन्होंने बताया की 18 पुराणों में सिर्फ भागवत ऐसा पुराण है जिसमें से 17 पुराणों की रचना वेदव्यास जी ने की है लेकिन भागवत पुराण में वही मिलेगा जो वेदों में है कथा में राजा परीक्षित को श्राप और मुक्ति सुखदेव जी का आगमन भीष्म स्तुति आदि प्रसंगों का भी वर्णन किया कथा के अंत में सभी कॉलोनी वासियों ने श्रीमद् भागवत कथा की आरती उतारी उसके उपरांत प्रसादी वितरण किया गया

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