स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए स्वभाव में अहंकार किस वजह से आता है?
अहंकार सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। यह हमारी आध्यात्मिक उन्नति में बाधा है। अहंकार के कारण व्यक्ति स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगता है और दूसरों के गुणों को नहीं देख पाता। इसके विपरीत, सच्ची विद्या विनम्रता और विवेक प्रदान करती है। विद्या से व्यक्ति में पात्रता और अच्छे संस्कार विकसित होते हैं, विद्या से अहंकार दूर होता है। अभिमान व्यक्ति को आत्ममुग्ध बनाकर उसकी प्रगति रोक देता है। इसलिए विनम्रता को अपनाएं। यही गुण व्यक्ति को श्रेष्ठ, सफल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है।
आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए स्वभाव में अहंकार किस वजह से आता है

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