July 19, 2026

ग्वालियर पुलिस के लिए एफएसएल विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

ग्वालियर पुलिस के लिए एफएसएल विषयक एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित

फॉरेंसिक तकनीक से विवेचना को नई मजबूती देने के लिए ग्वालियर पुलिस के अधिकारी व कर्मचरियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला

ग्वालियर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर धर्मवीर सिंह(भापुसे) के निर्देश पर अपराधों की वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार दिनांक 18 जून 2026 को पुलिस कंट्रोल रूम सभागार, ग्वालियर में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) संबंधी एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में रिटायर्ड डायरेक्टर एसएफएसएल डॉ. हर्ष शर्मा व उनके सहयोगी शिवानी सक्सेना एवं वरुण सुही ने पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

इस अवसर पर कार्यशाला में अति0 पुलिस अधीक्षक शहर(मध्य/यातायात) सुजावल जग्गा(भापुसे), अति0 पुलिस अधीक्षक शहर(पश्चिम/अपराध) श्रीमती सुमन गुर्जर, अति0 पुलिस अधीक्षक(ग्रामीण) जयराज कुबेर, रक्षित निरीक्षक ग्वालियर रणजीत सिंह सिकरवार, सूबेदार प्रेम राठौर, सहित ग्वालियर जिले के थानों से आए विवेचना अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला से पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर धर्मवीर सिंह(भापुसे) द्वारा प्रशिक्षण देने आये अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। तदुपरांत अति. पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) द्वारा उपस्थित पुलिस अधिकारियों को अपराधों की वैज्ञानिक एवं गुणवत्तापूर्ण विवेचना को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला की रूपरेखा से अवगत कराया।

प्रशिक्षण कार्यशाला में एफएसएल के विशेषज्ञ डॉ. हर्ष शर्मा द्वारा अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका, साक्ष्य संकलन एवं संरक्षण की वैज्ञानिक विधियों तथा आधुनिक तकनीकों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होने अपराध स्थल निरीक्षण, भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों का संकलन, डीएनए परीक्षण, फिंगरप्रिंट विश्लेषण, दस्तावेज परीक्षण, साइबर एवं डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण तथा न्यायालय में वैज्ञानिक साक्ष्यों की उपयोगिता जैसे विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। विशेषज्ञों द्वारा पुलिस अधिकारियों को विवेचना के दौरान अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक प्रक्रियाओं एवं सावधानियों के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा विभिन्न तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रश्न पूछे गए, जिनका विशेषज्ञ द्वारा विस्तारपूर्वक समाधान किया गया।

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